
ऋषिकेश
कहते हैं विकास जनता की सहूलियत के लिए होता है, लेकिन ऋषिकेश नगर निगम के शिवाजी नगर में यही विकास अब लोगों के लिए जी का जंजाल बनता जा रहा है। यहां की कच्ची सड़कों पर उड़ती धूल ने लोगों के सामने सांसों का संकट भी खड़ा कर दिया है। यह सुनने में अजीब जरूर है लेकिन शिवाजी नगर की यह कड़वी हकीकत है। मामला सीवर लाइन प्रोजेक्ट से जुड़ा है। शिवाजी नगर में सीवर लाइन बिछाने के लिए पहले पक्की सड़कों को बेरहमी से खोदा गया। फिर पाइपलाइन जमीन में दफन की गई। अब काम खत्म हुआ, लेकिन उसके बाद इन सड़कों का आलम यह है कि पूरी सड़क मरुस्थल में तब्दील हो चुकी है। आखिर सड़कें पक्की क्यों नहीं हो रहीं इसका जवाब वन भूमि प्रकरण से जुड़ा सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश है। अदालत का यह आदेश अब शिवाजी नगर के विकास की राह का सबसे बड़ा रोड़ा बन चुका है। पार्षद सुबह-शाम पानी के टैंकर मंगाकर मुख्य सड़क पर बौछार करवा रहे हैं, लेकिन तपती गर्मी में यह कोशिश ‘ऊंट के मुंह में जीरे’ जैसी है। पानी पड़ते ही थोड़ी देर में धूल फिर से आसमान छूने लगती है। मुख्य मार्ग के साथ क्षेत्र की अंदरूनी सड़को का भी यही हाल है। बता दे कि जब भी इन कच्ची सड़कों से कोई गाड़ी गुजरती है, तो पीछे धूल का ऐसा भयानक गुबार उठता है कि इंसान गायब हो जाए। विशेषज्ञों की मानें तो यह धूल आम लोगों को तो बीमार कर ही रही है, लेकिन सांस और अस्थमा के मरीजों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकती है। स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर इस इलाके में जिंदा रहना है, तो मास्क को अपना ढाल बना लें। प्रशासन कागजी घोड़ों में व्यस्त है और जनता धूल फांकने को मजबूर। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘दमघोटू’ समस्या से लोगों को कब और कैसे निजात दिलाता है।
