
ऋषिकेश
वीकेंड और सोमवती अमावस्या के पावन स्नान के चलते धर्मनगरी ऋषिकेश में इस समय पर्यटकों और श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं के वाहनों के कारण शहर की पूरी यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। सुबह से ही शहर के मुख्य मार्गों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगा हुआ है, जिससे स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

सड़कों पर रेंग रहे वाहन, एंबुलेंस भी फंसी
श्रद्धालुओं के वाहनों की भारी आमद के कारण हरिद्वार रोड और एम्स रोड जैसे मुख्य मार्ग पूरी तरह जाम से हांफते नजर आ रहे हैं। हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि आपातकालीन सेवाएं भी इससे अछूती नहीं हैं; मरीज को ले जा रही एंबुलेंस भी इस महाजाम में घंटों फंसने को मजबूर हैं। पुलिसकर्मी हर चौक-चौराहे पर मुस्तैद रहकर ट्रैफिक को सुचारू रूप से चलाने की जद्दोजहद कर रहे हैं, लेकिन वाहनों के भारी दबाव के आगे उनकी कोशिशें भी नाकामी साबित हो रही हैं।

हाईवे जाम तो गलियों में दौड़े टेंपो, बढ़ा हादसों का खतरा
मुख्य सड़कों पर लगे जाम से बचने के लिए स्थानीय ऑटो और टेंपो चालकों ने शहर के रिहायशी इलाकों और गलियों का रुख कर लिया है। रिहायशी गलियों में तेज रफ्तार दौड़ते वाहनों के कारण स्थानीय मोहल्ले के लोगों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की जान को खतरा पैदा हो गया है और हादसों की आशंका बढ़ गई है। आलम यह है कि जो गलियां शांत रहती थीं, वे भी अब ट्रैफिक जाम से पस्त हैं।
गूगल मैप के भरोसे गलियों में फंसे पर्यटक
इस जाम का असर बाहरी राज्यों से आए पर्यटकों पर भी देखने को मिल रहा है। मुख्य हाईवे पर फंसे पर्यटक जब गूगल मैप (Google Maps) के जरिए शॉर्टकट ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं, तो वे शहर की तंग गलियों में जाकर फंस रहे हैं। अनजान रास्तों और संकरी गलियों में भारी वाहनों के आ जाने से स्थिति और ज्यादा विकट हो गई है।

अतिक्रमण और राजनीतिक दबाव बना बड़ी वजह
स्थनीय लोगों और जानकारों की मानें तो इस बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था की सबसे बड़ी वजह शहर में पैर पसार चुका अतिक्रमण है। सड़कें पहले ही संकरी हैं, और उस पर दुकानों व रेहड़ियों के अतिक्रमण ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। चर्चा है कि राजनीतिक दबाव के चलते प्रशासनिक अधिकारी शहर से अतिक्रमण हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। इस प्रशासनिक शिथिलता का खामियाजा अब न सिर्फ बाहर से आने वाले श्रद्धालु, बल्कि ऋषिकेश के स्थानीय नागरिक भी भुगतने को मजबूर हैं।
