
ऋषिकेश
एम्स ऋषिकेश का आवासीय परिसर अब सुरक्षित नहीं रह गया है। संस्थान का भारी-भरकम सुरक्षा अमला और परिसर के भीतर ही संचालित पुलिस चौकी भी चोरी की बेखौफ वारदातों पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही हैं। दिनदहाड़े हुई चोरी की ताजा घटना ने आवासीय भवनों में रह रहे कर्मचारियों और उनके परिवारों में जान-माल की सुरक्षा को लेकर खौफ पैदा कर दिया है। पुलिस के मुताबिक अज्ञात चोरों ने चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय में कार्यरत रविंद्र तिवारी के क्वाटर को निशाना बनाया। रविंद्र और उनकी पत्नी जो स्वयं भी एम्स में कार्यरत हैं सुबह अपनी-अपनी ड्यूटी पर गए थे। जब रविंद्र वापस लौटे, तो घर के अंदर का मंजर देखकर उनके होश उड़ गए। चोरों ने क्वाटर में रखे लाखों रुपये मूल्य के सोने-चांदी के गहने और 60 हजार रुपये की नकदी पर हाथ साफ कर दिया था। पुलिस ने पीड़ित की तहरीर पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने एम्स परिसर की त्रिस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था के दावों की पोल खोलकर रख दी है। इससे पूर्व भी एम्स में अजनबियों के डॉक्टर का वेश बनाकर घूमने के मामले सामने आ चुके हैं। आवासीय परिसर में दिनदहाड़े हुई इस चोरी के बाद न केवल कर्मचारी, बल्कि अस्पताल की मुख्य इमारत में काम करने वाले स्टाफ और मरीजों के तीमारदार भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। वारदात से आक्रोशित एम्स कर्मचारियों ने संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. मीनू सिंह से मुलाकात कर अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई। पीड़ित रविंद्र तिवारी ने भी निदेशक को पूरी घटना से अवगत कराया। जनसंपर्क अधिकारी डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि घटना के बाद संस्थान में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक पुख्ता कर दिया गया है। सुरक्षा एजेंसी को गश्त बढ़ाने और नियमित तैनाती के सख्त निर्देश दिए हैं। सुरक्षा में हुई इस लापरवाही को लेकर संबंधित एजेंसी से जवाब तलब भी किया गया है। कोतवाल यशपाल बिष्ट का कहना है कि मामले की त्वरित जांच के लिए पुलिस टीम गठित कर दी गई है। अज्ञात चोरों की पहचान के लिए परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। जल्द ही मामले का पर्दाफाश कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
