
ऋषिकेश
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत और आर्थिक सशक्तिकरण के विजन को आगे बढ़ाते हुए शिक्षाविद् एवं साहित्यकार नरेन्द्र खुराना ने नागरिकों से आर्थिक जागरूकता की अपील की है। विभिन्न सामाजिक संगठनों में मीडिया सलाहकार के रूप में नि:शुल्क सेवाएं दे रहे खुराना ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए निवेश के पारंपरिक तरीकों में बदलाव और संतुलन की आवश्यकता पर जोर दिया।
सोने के आयात से अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
एम.कॉम एवं एम.ए. (अर्थशास्त्र) की उपाधि प्राप्त शिक्षक नरेन्द्र खुराना ने कहा कि भारत में सोने की अत्यधिक मांग के कारण बड़ी मात्रा में इसका विदेशों से आयात करना पड़ता है। इससे देश की विदेशी मुद्रा का एक बड़ा हिस्सा बाहर चला जाता है, जिसका सीधा असर राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि नागरिक सोने की अनावश्यक खरीद में संयम बरतें और अपनी बचत का सही नियोजन करें, तो देश की प्रगति को नई गति मिल सकती है। खुराना ने प्रधानमंत्री की आत्मनिर्भरता की भावना को साझा करते हुए कहा कि बचत के पैसे को केवल सोने में अवरुद्ध करने के बजाय उसे बैंकिंग, उद्योग, शिक्षा, व्यवसाय और अन्य उत्पादक क्षेत्रों में निवेश किया जाना चाहिए। इससे न केवल व्यक्तिगत लाभ होगा, बल्कि पूंजी का प्रवाह बढ़ने से रोजगार के अवसर और बुनियादी ढांचे का विकास भी होगा।
सांस्कृतिक महत्व और आर्थिक जागरूकता का समन्वय
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संस्कृति में स्वर्ण का धार्मिक और सामाजिक महत्व सर्वविदित है। उनका उद्देश्य किसी परंपरा का विरोध करना नहीं, बल्कि नागरिकों को आर्थिक दृष्टि से जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि आज समय की मांग है कि हम अपनी परंपराओं का सम्मान करते हुए राष्ट्रहित में संतुलित निवेश के निर्णय लें। आर्थिक मजबूती ही विकसित भारत की नींव बनेगी। नरेन्द्र खुराना के इन विचारों को स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग द्वारा सराहा जा रहा है, जो समाज में वित्तीय साक्षरता और देशहित के प्रति नई सोच पैदा करने की एक सार्थक पहल है।
