
ऋषिकेश
ऋषिकेश की सड़कों पर इन दिनों एक ऐसी श्रद्धा और संकल्प की कहानी घूम रही है, जो आस्था के साथ-साथ एक सामाजिक संदेश को भी अपने भीतर समेटे हुए है। मध्य प्रदेश के विदिशा से आए अभिषेक सनातनी की दंडवत यात्रा केवल भक्ति का मार्ग नहीं, बल्कि सोए हुए प्रशासन को जगाने की एक मार्मिक पुकार भी है। बता दे कि जहां लोग चारधाम यात्रा के लिए सुख-सुविधाओं की तलाश करते हैं, वहीं विदिशा के अभिषेक सनातनी ने एक कठिन मार्ग चुना है। वे पिछले एक साल से दंडवत प्रणाम करते हुए अपनी यात्रा पूरी कर रहे हैं और वर्तमान में ऋषिकेश के पड़ाव पर हैं। अभिषेक की यह यात्रा केवल व्यक्तिगत मोक्ष के लिए नहीं है। उनके अनुसार, इस कठिन तपस्या के पीछे एक गंभीर सामाजिक कारण है। वे बताते हैं कि उनके गृह क्षेत्र में गौचर भूमि पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है। इस संबंध में प्रशासन को 111 ज्ञापन सौंपे गए, लेकिन किसी के कान पर जूँ नहीं रेंगी। अब वह महादेव के दरबार में अर्जी लगाने जा रहे है।

ताकि गौमाता की जमीन मुक्त हो सके। अभिषेक ने बताया कि 15 में 2025 को उन्होंने अपनी यह यात्रा शुरू की थी जो वर्ष 2028 में संपन्न होगी। अब तक वह विदिशा से मथुरा वृंदावन हरिद्वार होते हुए ऋषिकेश पहुंचे हैं। आगे वह केदारनाथ फिर वैष्णो देवी और अंतिम पड़ाव अमरनाथ तक जाएंगे। इस सफर में उन्हें भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। वे बताते हैं कि कई बार जंगलों के बीच 10-10 दिनों तक भोजन नहीं मिलता। ऐसे में वे बिस्किट और नमकीन खाकर गुजारा करते हैं। प्यास लगने पर स्थानीय लोगों की मदद ही एकमात्र सहारा बनती है। अभिषेक सनातनी ने बताया कि उनकी सरकार से गौ माता को राष्ट्र माता का दर्जा और देश को पूर्ण हिंदू राष्ट्र बनाने की भी मांग है। पैसे और जीविका के सवाल पर अभिषेक ने बताया कि वे पेशे से फोटोग्राफर हैं और उनके दो भाई भी वेडिंग फोटोग्राफी का काम करते हैं। परिवार उनके इस कठिन संकल्प में पूरा साथ दे रहा है और जरूरत पड़ने पर आर्थिक मदद भी करता है। अभिषेक की यह यात्रा हमें याद दिलाती है कि जब व्यवस्था हार मान लेती है, तो एक साधारण व्यक्ति अपनी आस्था को ही हथियार बनाकर न्याय की गुहार लगाता है। ऋषिकेश से केदारनाथ की ओर बढ़ते उनके कदम अब महादेव के न्याय पर टिके हैं।
