
ऋषिकेश
ऋषिकेश स्थित श्यामपुर के ध्यान मंदिर में महाकाली वाहिनी का पहला राष्ट्रीय अधिवेशन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम में क्षेत्र और देश के विभिन्न हिस्सों से आईं दर्जनों महिलाओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अधिवेशन को संबोधित करते हुए महाकाली वाहिनी की राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. उदिता त्यागी ने संगठन के उद्देश्यों को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि महाकाली वाहिनी का मुख्य उद्देश्य मातृशक्ति को जागृत करना, समाज को भयमुक्त बनाना और आने वाली पीढ़ी को सुसंस्कृत करना है। आज महिलाओं को सिर्फ अधिकार ही नहीं, बल्कि समाज में अपनी उस शक्ति को पहचानना होगा जिससे वे राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकें। उन्होंने वैश्विक स्तर पर हिंदुओं के घटते जनसंख्या अनुपात पर गहरी चिंता व्यक्त की।

आबादी के असंतुलन को वर्तमान की कई समस्याओं का मुख्य कारण बताया। महाकाली वाहिनी ने प्रस्ताव पारित करते हुए अपना मुख्य लक्ष्य निर्धारित किया कि संगठन अब से प्रत्येक वर्ष कम से कम 10 लाख हिंदू नारियों को 4 से अधिक बच्चे पैदा करने के लिए मानसिक और सामाजिक रूप से तैयार करेगा। उन्होंने सनातन समाज से वैचारिक और मानसिक रूप से जागृत होने का आह्वान करते हुए कहा कि जब तक समाज अति प्रशिक्षित और संघर्ष के योग्य नहीं बनेगा, तब तक वह बाहरी चुनौतियों का सामना नहीं कर पाएगा। उन्होंने लव जिहाद जैसी साजिशों का मुकाबला करने के लिए मातृशक्ति को अपने भीतर महाकाली के स्वरूप को जागृत करने की बात कही। इस पहले अधिवेशन को लेकर महिलाओं में भारी उत्साह देखा गया। उन्होंने बताया कि इस संगठन के माध्यम से महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से सशक्त बनाया जाएगा ताकि वे किसी भी चुनौती का सामना निडर होकर कर सकें। कार्यक्रम के दौरान संगठन की मजबूती और समाज में महिलाओं की सुरक्षा व भागीदारी बढ़ाने के संकल्प के साथ कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव भी पारित किए गए। कार्यक्रम के अंत में दर्जनों महिलाओं ने महाकाली वाहिनी की सदस्यता ली और राष्ट्रहित में काम करने का संकल्प लिया।
