
ऋषिकेश
ऋषिकेश की गलियों में बिजली के खंबों पर अवैध रूप से लटके कई कंपनियों के तारों का अनियंत्रित जाल लोगों के लिए घातक बनता जा रहा है। आज वार्ड नंबर 10 सदानंद मार्ग पर एक बिजली के खंबे पर लगी आग की घटना ने यह साफ कर दिया कि बिजली विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा हैं। बिजली के पोल पर भड़की आग केवल एक शॉर्ट-सर्किट नहीं, बल्कि निजी ऑपरेटरों की मनमानी और प्रशासन की अनदेखी का प्रमाण है। बता दे कि आज वार्ड नंबर 10 में बिजली के एक खंभे से उठी चिंगारी ने सेकंडों में विकराल रूप ले लिया। इसका बड़ा कारण पोल पर लिपटा फाइबर ऑप्टिक्स और अवैध केबलों का गुच्छा दिखा। स्थानीय लोगों की सूचना पर दमकल विभाग की गाड़ी मौके पर आई और फायर कर्मियों ने आग बुझाई। इस हादसे ने नगर निगम की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्षेत्रीय पार्षद आशू डंग ने तीखे तेवर अपनाते हुए प्रशासन को घेरा है। उन्होंने साफ कहा कि बोर्ड बैठकों में इस खतरे पर कई बार चेतावनी दी गई। केबल बिछाने के लिए सिस्टमैटिक डक्टिंग का सुझाव दिया गया जिसे अनसुना किया गया। निजी इंटरनेट कंपनियों पर लगाम कसने में विभाग नाकाम रहा है। यह सिर्फ एक पोल की आग नहीं है बल्कि यह उस लापरवाही की आग है जो पूरे शहर को अपनी चपेट में ले सकती है। यह घटना ऋषिकेश के अन्य वार्डों के लिए भी एक चेतावनी है। घटना ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर इन ‘तारों के गुच्छों’ का समाधान तुरंत नहीं किया गया, तो ऋषिकेश की संकरी गलियां किसी दिन बड़े अग्निकांड का गवाह बन सकती हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि डिजिटल इंडिया के नाम पर निजी कंपनियां सड़कों पर तारों का कूड़ा जमा कर रही हैं। पूरे शहर के बिजली पोलों का सुरक्षा ऑडिट होना चाहिए। बिजली के खंभों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने वाली कंपनियों पर भारी जुर्माना लगना चाहिए। मामले में बिजली विभाग के अधिशासी अभियंता शक्ति सिंह प्रसाद ने बताया कि केवल इंटरनेट कंपनी ने 500 पोलों पर तार लगाने की अनुमति ली है। बाकी किसी भी कंपनी को विभाग की ओर से अनुमति नहीं दी गई है। जल्दी ही जांच कर संबंधित कंपनियों को नोटिस भेजा जाएगा।
