
ऋषिकेश
राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन ने सनातन धर्म के प्रमुख त्योहारों पर सरकारी छुट्टियों के मौजूदा ढांचे को लेकर सवाल खड़े किए हैं। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष राघवेंद्र भटनागर ने केंद्र सरकार से मांग की है कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था का सम्मान करते हुए प्रमुख हिंदू पर्वों को ‘अनिवार्य राष्ट्रीय अवकाश’ की श्रेणी में शामिल किया जाए। इस संबंध में आज एसडीएम कार्यालय के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन भेजा गया। भटनागर ने हाल ही में संपन्न हुए हनुमान जन्मोत्सव का उदाहरण देते हुए कहा कि यह पर्व दीपावली की तरह ही भव्यता और अटूट श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि आश्चर्य है कि हनुमान जन्मोत्सव जैसे महापर्व पर देश में कोई सरकारी छुट्टी नहीं थी, जबकि अगले ही दिन ‘गुड फ्राइडे’ पर राष्ट्रीय अवकाश था। गुड फ्राइडे भारत के बहुसंख्यक समुदाय का पर्व नहीं है, फिर भी उसे प्राथमिकता दी गई।
किन पर्वों पर अवकाश की है मांग?
संगठन ने मांग की है कि केवल दीपावली या होली ही नहीं, बल्कि निम्नलिखित महत्वपूर्ण तिथियों को भी राष्ट्रीय अवकाश घोषित किया जाए:
हनुमान जयंती, मौनी अमावस्या, कार्तिक स्नान
महाशिवरात्रि (विभिन्न प्रदेशों में अनिवार्य सूची में शामिल करने हेतु)
प्रधानमंत्री से सनातनी समाज को बड़ी उम्मीदें
राघवेंद्र भटनागर ने कहा कि वर्तमान केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री स्वयं ‘सनातन की ध्वजा’ को विश्व पटल पर गौरवान्वित कर रहे हैं। ऐसे में पूरे हिंदू समाज को यह विश्वास है कि सरकार इन भावनाओं को समझेगी। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्रीय अवकाश होने से न केवल सनातनी मान-मर्यादा का संरक्षण होगा, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जुड़ने का पूरा अवसर भी मिलेगा।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पांडे सहित भारी संख्या में संगठन के कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे। सभी ने एक सुर में इस मांग का पुरजोर समर्थन किया और इसे सनातन धर्म के सम्मान की लड़ाई बताया।
