
ऋषिकेश
तीर्थनगरी के हरिद्वार रोड स्थित आशीर्वाद वाटिका में बीती शाम राजस्थानी संस्कृति, परंपरा और खान-पान का अद्भुत संगम देखने को मिला। राजस्थानी सेवा समिति ऋषिकेश द्वारा आयोजित 77वें राजस्थान दिवस समारोह में प्रवासी राजस्थानियों ने अपनी जड़ों के प्रति अटूट प्रेम का प्रदर्शन किया। इस भव्य समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि विधायक प्रेमचंद अग्रवाल और समिति के अध्यक्ष रोहित कुमार राव ने दीप प्रज्वलित करके किया। इस अवसर पर उन्होंने राजस्थानी समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि राजस्थान की वीरता, त्याग और प्रेम की संस्कृति आज पूरे विश्व में अपनी अलग पहचान रखती है। कार्यक्रम में कई प्रशासनिक अधिकारियों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी शिरकत की। इस दौरान पूरा परिसर राजस्थान के पारंपरिक रंगों में रंगा नजर आया। आयोजकों के आह्वान पर अधिकांश अतिथि राजस्थानी पगड़ी और पारंपरिक परिधानों में पहुंचे। जिससे वातावरण पूरी तरह मरूधरा के रंग में सराबोर दिखा।

राजस्थानी कलाकारों ने कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी दी। कलाकारों द्वारा प्रस्तुत किए गए घूमर और कालबेलिया नृत्यों ने उपस्थित जनसमूह को झूमने पर मजबूर कर दिया। उत्सव का मुख्य आकर्षण राजस्थान का विश्वप्रसिद्ध व्यंजन दाल-बाटी और चूरमा रहा, जिसका अतिथियों ने भरपूर आनंद लिया। राजस्थानी सेवा समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य ऋषिकेश में रह रहे राजस्थानी मूल के परिवारों, विशेषकर युवा पीढ़ी को अपनी विरासत और गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराना है। यह केवल एक समारोह नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी की खुशबू को देवभूमि में महसूस करने का एक जरिया है। समारोह के समापन पर समिति ने सभी आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। राजस्थान दिवस के इस जश्न ने यह साबित कर दिया कि भौगोलिक दूरियों के बावजूद अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम कभी कम नहीं होता।
