
ऋषिकेश
तीर्थनगरी में प्रशासन की नाक के नीचे चल रहे बाल श्रम के खेल पर जिला टास्क फोर्स ने बड़ा प्रहार किया है। शुक्रवार को गीता नगर और काले की ढाल क्षेत्र में चलाए गए विशेष चेकिंग अभियान के दौरान टीम ने दो दुकानों से बच्चों को बाल श्रम करते हुए मुक्त कराया। इस मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए विभाग ने दोनों दुकानदारों के खिलाफ ऋषिकेश कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराने की तैयारी पूरी कर ली है।
फर्नीचर और टायर की दुकान पर हो रहा था शोषण
भिक्षावृत्ति और बाल श्रम की रोकथाम के लिए गठित जिला टास्क फोर्स को सूचना मिली थी कि व्यापारिक प्रतिष्ठानों में कम उम्र के बच्चों से काम कराया जा रहा है। राज्य समन्वय अधिकारी सुरेश उनियाल के नेतृत्व में टीम ने जब छापेमारी की, तो मंजर चौंकाने वाला था। काले की ढाल पर एक 13 वर्षीय किशोर को फर्नीचर की दुकान में भारी काम करते हुए पाया गया। गीता नगर में मात्र 11 वर्ष का बच्चा टायर सर्विस की दुकान पर खतरनाक परिस्थितियों में काम कर रहा था।
दुकानदारों को फटकार, बच्चों को भेजा गया CWC
कार्यवाही के दौरान राज्य समन्वय अधिकारी ने नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले दुकानदारों को जमकर फटकार लगाई। टीम ने दोनों बच्चों को उनके कब्जे से तत्काल मुक्त कराया और परिजनों को सूचित करने के बाद बच्चों को अपनी सुपुर्दगी में ले लिया। वर्तमान में दोनों बच्चों को बाल कल्याण समिति देहरादून भेज दिया गया है। जहाँ उन्हें सरकारी गाइडलाइन के अनुसार योजनाओं का लाभ दिलाया जाएगा।
बाल श्रम एक गंभीर कानूनी अपराध है। हमने दिसंबर माह में पूरे एक महीने दुकानदारों को जागरूक किया था, लेकिन चंद रुपयों के लालच में मासूमों का भविष्य दांव पर लगाया जा रहा है। ऐसे लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।” — सुरेश उनियाल, राज्य समन्वय अधिकारी
जागरूकता अभियान के बाद अब कार्रवाई का दौर
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 1 दिसंबर से 31 दिसंबर 2025 तक क्षेत्र में सघन जागरूकता अभियान चलाया गया था। इसके बावजूद बाल श्रम के मामले सामने आना यह दर्शाता है कि दुकानदार नियमों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। अब पुलिस प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से शहर के अन्य व्यापारियों में भी हड़कंप मचा हुआ है।
