देहरादून
जनपद में संभावित हादसों को रोकने और जनसुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने जर्जर व असुरक्षित भवनों के चिन्हीकरण और तकनीकी परीक्षण के कड़े निर्देश जारी किए हैं। वर्चुअल माध्यम से आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने अधिकारियों को स्पष्ट किया कि किसी भी भवन को गिरासू घोषित करने से पहले उसकी तकनीकी और संरचनात्मक जांच अनिवार्य रूप से की जाए।
बैठक के प्रमुख बिंदु
तकनीकी पहलुओं की गहन जांच: जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि किसी भी भवन को जर्जर घोषित करने से पूर्व उसके सभी ढांचागत (structural) पहलुओं की बारीकी से जांच हो, ताकि वास्तविक स्थिति का सटीक आकलन हो सके।
विशेषज्ञ तकनीकी टीमों का गठन: नगर निगम, नगर पालिका परिषद, लोक निर्माण विभाग (PWD) और मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के अधिकारियों को आपसी समन्वय से विशेषज्ञ टीमों का गठन कर सर्वेक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राथमिकता के आधार पर सर्वे: सभी उप जिलाधिकारियों (SDM), नगर निगमों और नगर पालिकाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में असुरक्षित भवनों को चिह्नित कर सूची तैयार करने और आसपास रहने वाले लोगों की सुरक्षा का परीक्षण करने के आदेश दिए गए हैं।
समयबद्ध व विधिक कार्रवाई: भवनों को गिरासू घोषित करने या हटाने की प्रक्रिया सभी विधिक और तकनीकी नियमों के तहत समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी।
अत्यधिक जर्जर भवनों पर तत्काल एक्शन: संवेदनशील और अत्यधिक जर्जर संरचनाओं पर विशेष सतर्कता बरतते हुए तुरंत सुरक्षात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि जनसुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और चिन्हीकरण की प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
इस बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह, अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के.के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, संयुक्त मजिस्ट्रेट राहुल आनंद, नगर आयुक्त ऋषिकेश विजयनाथ शुक्ला सहित जनपद के सभी उप जिलाधिकारी एवं संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
