
ऋषिकेश
आजकल के बच्चे दिनभर मोबाइल स्क्रीन पर उंगलियां घिस रहे हैं, लेकिन ऋषिकेश के इन जांबाजों ने कराटे की मैट पर पसीना बहाकर दिखा दिया कि असली दम किसमें है। आईडीपीएल स्थित रामलीला कमेटी भवन में आज रेन बुकई कराटे एकेडमी का जलवा देखने को मिला। जहां कराटे बेल्ट परीक्षा पास करने वाले खिलाड़ियों को बेल्ट और प्रमाणपत्रों से नवाजा गया। एकेडमी के कर्ता-धर्ता और इंटरनेशनल कराटे प्लेयर कोच कमल सिंह बिष्ट ने सीना चौड़ा करते हुए बताया कि इस बार परीक्षा का लेवल तगड़ा था, लेकिन बच्चों ने भी धमाकेदार परफॉर्मेंस देकर बेल्ट अपनी मुट्ठी में कर ली। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि बनकर पहुंचे अंतरराष्ट्रीय गढ़वाल महासभा के अध्यक्ष डॉ. राजे नेगी ने मंच से सीधे पेरेंट्स के दिल पर दस्तक दी। उन्होंने बिना लाग-लपेट के कहा कि यह जो बच्चे दिन-रात मोबाइल में घुसे रहते हैं ना, ये उनके दिमाग और शरीर दोनों को खोखला कर रहा है। रील देखने से जिंदगी नहीं बनती। बच्चों को खेल के मैदान में भेजिए।

कराटे सिर्फ लात-घूंसे चलाना नहीं सिखाता, बल्कि यह वो फौलाद तैयार करता है जिसमें गजब का अनुशासन, अटूट आत्मविश्वास और कमाल का फोकस होता है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष अविनाश सेमल्टी और समाजसेवी आशुतोष शर्मा ने भी बच्चों की पीठ थपथपाई और कहा कि असली पबजी मैदान में आकर कराटे खेलने में है। कार्यक्रम के आखिरी में जब बच्चों ने अपनी नई चमचमाती बेल्ट्स बांधी, तो हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। ट्रेनर्स और पेरेंट्स की आंखों में गर्व साफ दिख रहा था। सभी ने एक सुर में कहा रुकना नहीं है, अब सीधे ब्लैक बेल्ट पर निशाना लगाना है। इस कार्यक्रम में शहर के नन्हे फाइटर्स ने कमाल का प्रदर्शन किया।
