
गोविंदघाट, चमोली
विश्व प्रसिद्ध सिख तीर्थस्थल श्री हेमकुंट साहिब की वार्षिक यात्रा को लेकर तैयारियां युद्धस्तर पर शुरू हो गई हैं। बुधवार 15 अप्रैल को गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सेवादारों और भारतीय सेना की 418 माउंटेन ब्रिगेड की एक टुकड़ी ने अरदास के बाद गोविंदघाट से घंगरिया के लिए कूच किया। यह संयुक्त दल मार्ग पर जमी भारी बर्फ को काटकर रास्ता बनाने का कार्य करेगा। ट्रस्ट के सीईओ सरदार सेवा सिंह ने जवानों और सेवादारों के दल को हरी झंडी दिखाकर विदा किया। हाल ही में की गई रेकी में यह पाया गया है कि हेमकुंट साहिब और विशेषकर अटलकोटी ग्लेशियर के पास अभी भी 8 फीट से अधिक बर्फ जमी हुई है। सेना के जवान और सेवादार घंगरिया में अपना बेस बनाएंगे और वहां से प्रतिदिन ऊपर की ओर चढ़कर बर्फ की सफाई करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि अगले तीन सप्ताह में मार्ग पूरी तरह से साफ कर दिया जाएगा, ताकि तीर्थयात्री सुरक्षित यात्रा कर सकें। बता दे कि समुद्र तल से लगभग 15,200 फीट की ऊंचाई पर स्थित श्री हेमकुंट साहिब न केवल अपनी आध्यात्मिक शांति बल्कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के लिए भी जाना जाता है। सात पर्वत शिखरों और पवित्र लोकपाल झील से घिरे इस स्थल का विशेष धार्मिक महत्व है। माना जाता है कि यहां सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने पूर्व जन्म में तपस्या की थी। ट्रस्ट के अध्यक्ष सरदार नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने भारतीय सेना के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए कहा कि सेना का निःस्वार्थ सहयोग ही इस कठिन यात्रा को हर वर्ष सफल और सुरक्षित बनाता है। उन्होंने इस पुनीत कार्य में जुटे सभी सेवादारों के समर्पण की भी सराहना की। उन्होंने बताया कि 23 मई को धाम के पवित्र कपाट खुलेंगे।
