
रायवाला स्थित ड्रीम वेडिंग पॉइंट में शनिवार को ‘रामायण रिसर्च काउंसिल’ की एक महत्वपूर्ण प्रदेश स्तरीय बैठक आयोजित की गई। ऋषिकेश नगर निगम की पूर्व महापौर और काउंसिल की उत्तराखंड प्रदेश संयोजक अनिता ममगाईं के नेतृत्व में आयोजित इस बैठक में आगामी सांस्कृतिक कार्यक्रमों और संगठन विस्तार पर चर्चा की गई।
मां जानकी: त्याग और मर्यादा की प्रतिमूर्ति
बैठक को संबोधित करते हुए अनिता ममगाईं ने कहा कि माता सीता मां जानकी केवल मिथिला की पुत्री नहीं, बल्कि समस्त नारी जाति के लिए त्याग, सहनशीलता और मर्यादा का सर्वोच्च प्रतीक हैं। उन्होंने कहा जिस प्रकार अयोध्या में प्रभु श्री राम का भव्य मंदिर निर्मित हुआ है, अब उनकी अर्धांगिनी मां जानकी के भव्य मंदिर का निर्माण बिहार के सीतामढ़ी में होने जा रहा है। यह संपूर्ण राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है।

25 अप्रैल को होगा भव्य भूमि पूजन
अनिता ममगाईं ने जानकारी दी कि आगामी 25 अप्रैल को बिहार के सीतामढ़ी पुनौरा धाम में मां जानकी के भव्य मंदिर का भूमि पूजन होना है। इस ऐतिहासिक अवसर पर उत्तराखंड से बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष ‘सीता सखी’ के रूप में वहां पहुंचेंगे। उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं से अधिक से अधिक संख्या में संगठन से जुड़ने का आह्वान किया।
सनातन संस्कृति का संरक्षण है मुख्य लक्ष्य
बैठक के दौरान वक्ताओं ने बताया कि रामायण रिसर्च काउंसिल का उद्देश्य नई पीढ़ी को संस्कारित करना, सनातन धर्म को सशक्त बनाना और सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण करना है। उल्लेखनीय है कि माता जानकी, जिन्हें ‘भूमिजा’ भी कहा जाता है, का प्राकट्य सीतामढ़ी में हल चलाते समय भूमि से हुआ था। बिहार सरकार ने भी इस जन्मस्थली के विकास के लिए 882 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।

बैठक में ये गणमान्य रहे उपस्थित
कार्यक्रम का सफल संचालन कृपाल सिंह बिष्ट ने किया। इस अवसर पर कई महिलाओं ने ‘सीता सखी’ के रूप में संगठन की सदस्यता ग्रहण की। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित लोग उपस्थित रहे।
भगवान सिंह पोखरियाल (पूर्व ब्लॉक प्रमुख)
दिव्या बेलवाल (जिला पंचायत सदस्य)
शैलेन्द्र रंगन व राजेश जुगरान (ग्राम प्रधान)
बीना बगवाल (मंडल अध्यक्ष, महिला मोर्चा)
इसके अलावा कमलेश भंडारी, कुंवर सिंह नेगी, गीता रावत, रमेश रयाल, सीपी ममगाईं और अन्य स्थानीय प्रतिनिधि मौजूद रहे।
