
ऋषिकेश
ई-फार्मेसी के संचालन और बड़े कॉर्पोरेट्स द्वारा की जा रही प्रीडेटरी प्राइसिंग के विरोध में आज केमिस्ट एसोसिएशन ऋषिकेश से जुड़े दवा व्यापारियों ने राष्ट्रव्यापी बंद का समर्थन करते हुए शहर में जोरदार प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के देशव्यापी आह्वान पर ऋषिकेश की दवा दुकानें पूरी तरह बंद रखी। जिससे करोड़ों रुपयों का दवा कारोबार प्रभावित हुआ।
बता दे कि आज केमिस्ट एसोसिएशन ऋषिकेश से जुड़े तमाम पदाधिकारी और सदस्य शहर के देहरादून तिराहे पर एकत्रित होना शुरू हुए। यहां सभी दवा व्यापारियों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। इसके बाद एसोसिएशन के नेतृत्व में शहर के मुख्य मार्गों पर पैदल रैली निकाली।

रैली के दौरान केमिस्टों ने सरकार और कॉर्पोरेट नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को एक ज्ञापन भी भेजा। ज्ञापन में देश के 12.40 लाख से अधिक केमिस्टों और उनके परिवारों की आजीविका का हवाला देते हुए ऑनलाइन बिना डॉक्टर के पर्चे के धड़ल्ले से बेची जा रही दवाओं पर तुरंत प्रतिबंध लगाने की मांग की। इसके अलावा सरकार द्वारा पूर्व में जारी की गई इन अधिसूचनाओं को तुरंत वापस लेने की मांग की गई, जो कोरोना काल के दौरान आपातकालीन प्रावधानों के तहत लागू की गई थीं। बड़े कॉर्पोरेट्स द्वारा अत्यधिक छूट देकर बाजार का संतुलन बिगाड़ने और छोटे दुकानदारों को खत्म करने की साजिश पर रोक लगाने की मांग को भी दोहराया।

केमिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप मल्होत्रा, कोषाध्यक्ष गोपाल नारंग और सचिव वीरभद्र रतूड़ी ने संयुक्त रूप से कहा कि दवा कोई सामान्य वस्तु नहीं है, यह सीधे तौर पर मानव जीवन और स्वास्थ्य से जुड़ी है। ऑनलाइन और अनियंत्रित माध्यमों से दवाओं की बिक्री के कारण बिना वैध पर्चे के दवाओं का दुरुपयोग बढ़ रहा है। एंटीबायोटिक्स की अत्यधिक उपलब्धता से एंटी-माइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा पैदा हो रहा है। फार्मासिस्ट और मरीज के बीच सीधा संवाद खत्म हो रहा है, जिससे नकली दवाओं के बाजार में आने का जोखिम बढ़ गया है। इस बंद और आंदोलन को सफल बनाने में विनोद कोठारी, विकास गोयल, सी.पी. चमोली, मुकेश भट्ट, प्रदीप सेमवाल, संजय काला, प्रेम किशोर नौटियाल, गौरव कक्कड़, दिनेश कोठारी, दीपांशु तिवारी, राजेश रावत, दीपक भट्ट, अनूप कंसल, पवन अरोड़ा सहित एसोसिएशन के दर्जनों केमिस्टों और दवा विक्रेताओं ने पूरा समर्थन दिया। व्यापारियों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि केंद्र और राज्य सरकार ने छोटे दवा व्यवसायियों के अस्तित्व को बचाने के लिए जल्द ही कोई ठोस और सुधारात्मक कदम नहीं उठाए, तो इस आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
