पौड़ी
पहाड़ों से पलायन की खबरों के बीच पौड़ी जिले से एक प्रेरणादायक खबर सामने आई है। कोट ब्लॉक के कांडई गांव निवासी संजीव बछेती ने दिल्ली-एनसीआर में 26 साल बिताने के बाद गांव लौटकर स्वरोजगार की अनूठी मिसाल कायम की है। वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान गांव लौटे संजीव ने शहर वापस न जाकर यहीं मसालों का कारोबार शुरू किया, जो आज ‘मांजी मसाले’ ब्रांड के नाम से पहचान बना चुका है। मुख्य विकास अधिकारी अशोक जोशी के अनुसार, संजीव बछेती ने प्रधानमंत्री रोजगार योजना के तहत ऋण लेकर मसाला यूनिट की शुरुआत की। जिस पर उन्हें 35 प्रतिशत सब्सिडी मिली। हल्दी, मिर्च और धनिया से शुरू हुआ यह कारोबार अब हरी-बड़ी इलायची, तेजपत्ता, मंडुवा, झंगोरा और विभिन्न पहाड़ी दालों तक फैल चुका है। स्थानीय स्तर पर खरीदे गए कच्चे माल की सफाई, पिसाई और पैकिंग यूनिट में ही की जाती है।
स्थानीय लोगों और परिवार को मिला संबल
संजीव ने न केवल खुद को स्वरोजगार से जोड़ा, बल्कि 8 स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी दिया है। उनकी यूनिट में 4 ग्रामीण महिलाएं उत्पादन और विपणन से जुड़ी हैं, जबकि 3 अन्य लोग लॉजिस्टिक्स और सप्लाई संभालते हैं।
महिलाओं को आत्मनिर्भरता: पिछले 4 वर्षों से काम कर रहीं स्थानीय निवासी कविता देवी और दीप्ति देवी ने बताया कि गांव के पास ही रोजगार मिलने से वे घरेलू जिम्मेदारियों के साथ परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर पा रही हैं।
युवाओं के लिए प्रेरणा: संजीव के बड़े बेटे अक्षत बछेती ने दिल्ली में 12वीं तक पढ़ाई करने के बाद शहर में नौकरी के बजाय गांव में पिता के व्यवसाय को चुना। अक्षत का मानना है कि युवाओं को गांव में ही स्वरोजगार के अवसरों पर ध्यान देना चाहिए।
पौड़ी से देहरादून तक मांग
‘मांजी मसाले’ के उत्पाद अब पौड़ी के साथ-साथ टिहरी और देहरादून तक सप्लाई हो रहे हैं। जिला प्रशासन भी विभिन्न सरकारी आयोजनों में स्टॉल उपलब्ध कराकर उत्पादों के विपणन में सहयोग कर रहा है।
संजीव बछेती बताते हैं कि उत्पादों की गुणवत्ता और ग्राहकों का भरोसा ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी है। 26 साल बाद गांव लौटकर सफल कारोबार खड़ा करने की उनकी यह पहल साबित करती है कि पहाड़ में अवसर तलाशने ही नहीं, बल्कि नए अवसर पैदा करने की भी अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
