हेमकुंट साहिब
विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल श्री हेमकुंट साहिब के पावन कपाट आज (शनिवार) को शीतकाल के लिए श्रद्धा और भक्ति के अलौकिक माहौल में विधि-विधान के साथ बंद कर दिए गए। इस वर्ष की यात्रा के समापन अवसर पर देश-विदेश से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने नम आंखों और गुरु चरणों में अरदास के साथ विदाई ली। अब यह पवित्र यात्रा ग्रीष्मकाल 2027 में पुनः आरंभ होगी।
सुखमनी साहिब के पाठ और शबद कीर्तन से हुआ समापन
समारोह की शुरुआत पावन सुखमनी साहिब के पाठ से हुई। इसके उपरांत, श्री दरबार साहिब (अमृतसर) के हज़ूरी रागी सिंह गुरदियाल सिंह और उनके जत्थे ने मधुर शबद कीर्तन प्रस्तुत कर वातावरण को पूरी तरह आध्यात्मिक बना दिया। इसके पश्चात यात्रा की अंतिम अरदास संपन्न हुई। जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल के गगनभेदी जयकारों के बीच श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को एक भव्य और अनुशासित शोभायात्रा के साथ उनके शीतकालीन निवास ‘सचखंड’ सत्कार सहित ले जाया गया। शोभायात्रा का नेतृत्व गढ़वाल स्काउट्स बैंड और 418 इंडिपेंडेंट इंजीनियर कोर के जवानों ने किया। सेना के इन जवानों ने समारोह के दौरान भीड़ प्रबंधन का कमान भी बखूबी संभाला।

5000 श्रद्धालुओं ने बर्फबारी के बीच टेका मत्था
बीते कल से हल्की बर्फबारी शुरू होने के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं आई। प्रतिकूल मौसम और ठंड की परवाह किए बिना आज लगभग 5 हजार श्रद्धालुओं ने हेमकुंट साहिब पहुंचकर माथा टेका और आशीर्वाद प्राप्त किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहुंचे श्रद्धालु, पाकिस्तान से आया 48 लोगों का जत्था
इस वर्ष की यात्रा में वैश्विक स्तर पर भारी उत्साह देखा गया। संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, यूरोप, मलेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर और दुबई समेत दुनिया भर के तीर्थयात्री दर्शन के लिए पहुँचे। विशेष बात यह रही कि पाकिस्तान से आए 48 तीर्थयात्रियों के एक विशेष जत्थे ने भी इस पावन अवसर पर कपाट बंद होने के साक्षी बनकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

प्रशासन और सेना का जताया गया आभार
गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के चेयरमैन सरदार नरिंदरजीत सिंह बिंद्रा ने इस वर्ष की सफल यात्रा के लिए सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विशेष तौर पर:
भारतीय सेना, राज्य सरकार और ज़िला प्रशासन का सहयोग के लिए धन्यवाद किया।
पुलिस और राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ) के जवानों की सराहना की, जिन्होंने पूरी यात्रा के दौरान तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को सुचारु रखा।
सभी गुरुद्वारों के सेवादार स्टाफ की निष्ठा एवं परिश्रम की प्रशंसा की। साथ ही, ट्रस्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सरदार सेवा सिंह ने भी संगत के अनुशासन और सहयोग के प्रति आभार व्यक्त किया। चेयरमैन ने जानकारी दी कि अब ‘रतूड़ा गुरुद्वारा’ भी संगत के लिए पूरी तरह खुल चुका है।
