ऋषिकेश
गंगा तटों, जलस्रोतों और पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्पित ‘द हिमाद्री फाउंडेशन’ ने सोमवार, को ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर अपनी 82वीं स्वच्छता मुहिम सफलतापूर्वक आयोजित की। पिछले दो वर्षों से निरंतर चल रहे इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सिंगल-यूज प्लास्टिक के प्रयोग को खत्म करना, तटीय पारिस्थितिकी को बचाना और आम जनमानस में पर्यावरण के प्रति सक्रिय दायित्व की भावना जागृत करना है।
देशभर के प्रमुख युवा संगठनों ने मिलाया हाथ
इस 82वें अभियान में द हिमाद्री फाउंडेशन के साथ देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रमुख यूथ-लेड संगठनों ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। इनमें मुख्य रूप से एनवायरनमेंट क्लब मेरठ, टियर्स ऑफ द अर्थ दिल्ली, कल्चरल कैडेट कलेक्टिव शामिल रहे। विशेष रूप से ऋषिकेश पहुंचे इन युवा संगठनों ने हिमाद्री फाउंडेशन के कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर त्रिवेणी घाट और आसपास के तटवर्ती क्षेत्रों से भारी मात्रा में प्लास्टिक कचरा और अजैविक अपशिष्ट एकत्र किया।

महंत लोकेश दास जी ने किया सम्मानित, पर्यावरण पर हुआ गहन मंथन
स्वच्छता अभियान के पश्चात संत महंत लोकेश दास जी ने दूर-दराज से आए सभी सहयोगी संगठनों और युवाओं के निस्वार्थ प्रयासों की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने उपस्थित युवाओं को अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। इस दौरान महंत जी के साथ युवाओं की लगभग एक घंटे की विशेष परिचर्चा भी हुई। परिचर्चा में इस विषय पर गहन विचार-विमर्श हुआ कि युवा शक्ति मिलकर नदियों, वनों और समग्र पर्यावरण के संरक्षण हेतु किस प्रकार दीर्घकालिक और प्रभावी कदम उठा सकती है। महंत जी ने युवाओं का मार्गदर्शन करते हुए उन्हें प्रकृति रक्षा के इस पावन संकल्प को निरंतर आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी।
नगर निगम व प्रशासन से की ठोस कचरा प्रबंधन की मांग
अभियान के दौरान द हिमाद्री फाउंडेशन और सहयोगी संगठनों ने स्थानीय नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए गंगा तटों की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। संस्थाओं का आरोप है कि नगर निगम का सफाई अभियान केवल आसानी से सुलभ चुनिंदा स्थानों तक ही सीमित है, जबकि गंगा के अंदरूनी और संवेदनशील तटवर्ती इलाकों में कचरा प्रबंधन की भारी कमी है। इसके चलते बारिश और हवा के साथ प्लास्टिक कचरा सीधे गंगा में बह जाता है।

फाउंडेशन ने नगर निगम प्रशासन से पुरजोर अपील की है कि गंगा के प्रत्येक तट पर नियमित सफाई कर्मियों की स्थायी तैनाती की जाए और कचरा निस्तारण की वैज्ञानिक एवं ठोस व्यवस्था तत्काल लागू की जाए।
