ऋषिकेश / डोईवाला
हरिद्वार देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग स्थित लालतप्पड़ डेंटल कॉलेज के समीप एक दिल दहला देने वाले भयानक सड़क हादसे से पूरा इलाका दहल उठा। रफ्तार और बदहाल व्यवस्था ने नेशनल हाईवे को एक बार फिर खून से लाल कर दिया। हिमालयन विश्वविद्यालय की बस, अर्टिगा कार और पीछे से आ रही ब्लैक क्रेटा कार के बीच हुई त्रिकोणीय टक्कर में वाहनों के परखच्चे उड़ गए। टक्कर इतनी तीव्र थी कि अर्टिगा कार खिलौने की तरह घूमकर सड़क पर विपरीत दिशा में जा मुड़ी।
एयरबैग खुले, चीख-पुकार से दहला हाईवे
हादसे का मंजर इतना खौफनाक था कि अर्टिगा कार के एयरबैग तक खुल गए, लेकिन फिर भी उसमें सवार 5 से 6 लोग लहूलुहान होकर अंदर ही फंस गए। चीख-पुकार सुनकर दौड़े स्थानीय लोगों ने देवदूत बनकर घायलों को बाहर निकाला। हादसे में अर्टिगा सवार 2 से 3 लोगों की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। वहीं, पीछे से आ रही काली क्रेटा कार भी खुद पर नियंत्रण नहीं रख सकी और इस भीषण तबाही की चपेट में आकर पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के तुरंत बाद 108 आपातकालीन एंबुलेंस सेवा के जरिए सभी गंभीर घायलों को इलाज के लिए निकटतम अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
घंटों थमा रहा एनएच का पहिया, पुलिस ने मशक्कत के बाद खुलवाया जाम
दुर्घटना के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर मलबा बिखरने और वाहनों के क्षतिग्रस्त होने के कारण दोनों ओर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। देखते ही देखते हाईवे पर भीषण जाम की स्थिति पैदा हो गई। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन ने दलबल के साथ मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पुलिस कर्मियों ने कड़ी मशक्कत और क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हाईवे से हटवाया, तब जाकर घंटों बाद यातायात सुचारू हो सका।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
इस खूनी हादसे ने एनएचएआई और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के मौसम में लालतप्पड़ का मुख्य पुल बह गया था। महीनों बीत जाने के बावजूद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने इस पुल का पुननिर्माण कराने की जहमत नहीं उठाई। टूटा हुआ पुल और डायवर्जन अब वाहन चालकों के लिए ‘डेथ ट्रैप’ (खूनी पॉइंट) बन चुका है। क्षेत्रवासियों ने गुस्से में कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी जिम्मेदार विभाग नींद से नहीं जाग रहा है। जिसकी कीमत निर्दोष यात्रियों को अपनी जान जोखिम में डालकर चुकानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि इस डेथ स्पॉट पर जल्द से जल्द पक्के पुल का निर्माण शुरू नहीं हुआ, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। मामले में विभाग की ओर से पक्ष आने के बाद प्रकाशित किया जाएगा।

