
ऋषिकेश
एक तरफ उत्तराखंड में प्री-मानसून की दस्तक हो चुकी है और महज 20 से 25 दिनों के भीतर मुख्य मानसून भी आने वाला है। ऐसे नाजुक समय में ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट और नाव घाट के पुनर्विकास के लिए आनन-फानन में शुरू किए गए 85 करोड़ के भारी-भरकम प्रोजेक्ट के भविष्य पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। जनता और जानकारों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब कुछ ही दिनों में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़कर खतरे के निशान तक पहुंचेगा, तो इस समय धरातल पर किए जाने वाले करोड़ों रुपये के विकास कार्य आखिर कैसे सुरक्षित रह पाएंगे। क्या यह सीधे तौर पर सरकारी बजट को पानी में बहाने जैसी लापरवाही है। इस पूरे मामले को लेकर जब उत्तराखंड परियोजना विकास निगम लिमिटेड (UPDCC) के प्रोजेक्ट मैनेजर एस.के. सिंह से बात की गई, तो उनके जवाबों ने इस चिंता को और बढ़ा दिया है। उनके मुताबिक, टेंडर तो आवंटित हो चुका है और ठेकेदार ने मशीनें भी जुटा ली हैं, लेकिन काम के नाम पर अभी केवल कुछ दीवारें ही खड़ी की जा रही हैं।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस प्रोजेक्ट का असल मालिक सिंचाई विभाग नहीं, बल्कि यूआईआईडीबी यानी कि उत्तराखंड स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड है। UPDCC तो सिर्फ एक कार्यदायी संस्था है जो केवल आदेशों का पालन कर रही है। ऐसे में विभागों के बीच तालमेल की कमी और ऐन मानसून के वक्त काम शुरू करने की टाइमिंग पर सवाल उठना लाजिमी है। बता दे कि हर साल मानसून के दौरान पहाड़ों में होने वाली भारी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर अत्यधिक बढ़ जाता है। त्रिवेणी घाट का मुख्य आरती स्थल और पूरा घाट क्षेत्र पूरी तरह जलमग्न हो जाता है। जब यह बात खुद अधिकारियों को पता है, तो मानसून के ठीक पहले निर्माण कार्य शुरू करने की इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई जा रही है। प्रोजेक्ट मैनेजर एसके सिंह का तर्क है कि प्रोजेक्ट की अवधि 18 महीने है। इसलिए अभी फिनिशिंग का कोई काम नहीं किया जा रहा है, सिर्फ वही काम कर रहे हैं जो मानसून से पहले सुरक्षित रह सके। लेकिन यह दलील गले नहीं उतरती। उफनती गंगा के तेज बहाव के सामने कंक्रीट का कच्चा निर्माण कितना टिक पाएगा, इसका अंदाजा पूर्व में हुई आपदाओं से साफ लगाया जा सकता है। घाट को ऊंचा उठाने के नाम पर 85 करोड़ से ज्यादा की इस बड़ी परियोजना को जिस तरह मानसून के मुहाने पर लाकर खड़ा किया गया है, उससे स्थानीय लोगों में गहरा असंतोष है। यदि आगामी 20 दिनों में आने वाली बाढ़ के पानी में शुरुआती निर्माण बह जाता है या क्षतिग्रस्त होता है, तो इस भारी नुकसान की जिम्मेदारी किसकी होगी।
