
घर जमीन बचाने के लिए सड़कों पर उतरा हुजूम। 20 हजार लोग और डेढ़ किलोमीटर लंबी रैली देख……
ऋषिकेश
वन भूमि प्रकरण में अपने घर जमीन बचाने के लिए शिवाजी नगर, मीरा नगर, 20 बीघा, बापू ग्राम, मनसा देवी, अमित ग्राम के हजारों निवासी सड़क पर उतर गए। लोगों ने आईडीपीएल से बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले ऋषिकेश बचाओ संघर्ष रैली निकाली। रैली में करीब 20 हजार से अधिक लोगों ने एकता का परिचय दिखाते हुए अपना दम सरकार को दिखाया। राज्य सरकार वन भूमि को डिफॉरेस्ट का प्रस्ताव पास कर केंद्र सरकार को भेजने या क्षेत्र को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग की। करीब डेढ़ किलोमीटर लंबी रैली 8 किलोमीटर का सफर तय कर तहसील परिसर पहुंची। यहां एसडीएम के माध्यम से लोगों ने राज्य और केंद्र सरकार को ज्ञापन भेजा। अपने घरों को उजड़ने से बचाने के लिए नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।

लोगों ने कहा कि आजादी की दशक से पहले बसे इन इलाकों के लोगों को सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर ना उजाड़ा जाए। वह लोग सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार को जनता के हित में फैसला लेने की जरूरत है। लोगों ने कहा कि वह कोई भीख नहीं मांग रहे बल्कि अपना हक मांग रहे हैं और इस हक को देने का काम राज्य और केंद्र सरकार ने करना है। क्योंकि इन इलाकों में राज्य और केंद्र सरकार की करोड़ों रुपए की विकास योजनाएं अब तक धरातल पर उतर चुकी है और कुछ गतिमान है। बापू ग्राम बचाओ संघर्ष समिति की इस विशाल रैली की सफलता पर आयोजको ने क्षेत्रीय जनता का आभार व्यक्त किया है। रैली में मुख्य रूप से रविंद्र राणा, सुधीर राय, सुरेंद्र सिंह नेगी, मास्टर दिनेश चंद, पूर्व महापौर अनीता ममगाई, पूर्व पार्षद सुंदरी कंडवाल, सिद्धार्थ त्रिपाठी, जयेंद्र रमोला ललित मोहन मिश्रा सहित तमाम नेता शामिल रहे।
रैली के समर्थन में दुकानदारों ने शटर किये डाउन

आईडीपीएल से तहसील परिसर तक निकली विशाल रैली के समर्थन में शहर के व्यापारी भी नजर आए। उन्होंने अध्यक्ष ललित मोहन मिश्रा और महामंत्री प्रतीक कालिया के आह्वान पर रैली को अपना समर्थन दिया और रैली के शहर के बीच से गुजरने के दौरान अपने-अपने प्रतिष्ठानों के शटर डाउन कर दिए। व्यापारियों ने कहा कि हजारों लोगों पर जो इस समय मुसीबत आन खड़ी हुई है, इस बुरे वक्त के दौर में पूरा व्यापार मंडल उनके साथ खड़ा है। तन मन धन से वन भूमि मामले में प्रभावितों के साथ वह खड़े हैं।
