मुनिकीरेती
“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय…” यह कहावत परमार्थ निकेतन घाट पर उस वक्त सच साबित हुई, जब गंगा की उफनती लहरों के बीच जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे एक श्रद्धालु की जान बचाने को जल पुलिस मुनिकीरेती के जवान ‘देवदूत’ बनकर पहुंचे।
अचानक फिसला पैर, बहने लगा 40 वर्षीय कामता प्रसाद
उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से आए 40 वर्षीय कामता प्रसाद परमार्थ निकेतन के पास गंगा में आस्था की डुबकी लगाने उतरे। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह पलक झपकते ही गंगा के बेहद तेज बहाव की चपेट में आ गए।

जल पुलिस का ‘सुपर-फास्ट’ रेस्क्यू ऑपरेशन
घाट पर चीख-पुकार मचते ही वहां मुस्तैद जल पुलिस मुनिकीरेती के जवानों ने एक पल की भी देरी नहीं की। बोट या पारंपरिक संसाधनों के इंतजार में समय गंवाने के बजाय, जवानों ने मौके पर मौजूद एक स्थानीय निवासी से तुरंत ट्यूब ली और जल पुलिस का एक जवान ट्यूब लेकर उफनती गंगा में कूद पड़ा। अदम्य साहस और सूझबूझ का परिचय देते हुए जवान ने तेज बहाव के बीच पहुंचकर कामता प्रसाद को कसकर पकड़ लिया और सुरक्षित किनारे पर खींच निकाला।
“जवानों ने मुझे नया जीवन दिया”
सकुशल रेस्क्यू किए जाने के बाद कामता प्रसाद पूरी तरह स्वस्थ हैं। जब उनसे बात की गई तो उनकी आंखें नम थीं। उन्होंने कांपती आवाज में जल पुलिस का आभार जताते हुए कहा, “अगर आज जल पुलिस के जवान अपनी जान जोखिम में डालकर तुरंत न कूदते, तो शायद मैं जिंदा न बचता। इन्होंने मुझे नया जीवन दिया है।” जल पुलिस की इस मुस्तैदी और दिलेरी की स्थानीय लोगों और घाट पर मौजूद अन्य श्रद्धालुओं ने भी जमकर सराहना की।
