
उत्तराखंड की आंगनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं की सेहत के साथ खिलवाड़ करने का मामला सामने आया है। इन केंद्रों में नौनिहालों और गर्भवती महिलाओं को दिए जाने वाले राशन की गुणवत्ता संदिग्ध पाई गई है। बता दे कि राशन की गुणवत्ता पर हुई शिकायतों का संज्ञान लेते हुए डीएम देहरादून सविन बंसल ने रुड़की स्थित सेंट्रल गोदाम पर औचक छापेमारी की। इस दौरान डीएम को चौंकाने वाली कमियां मिलीं। गोदाम में बाल श्रमिक काम करते पाए गए। डीएम ने इसे बेहद गंभीर मानते हुए बाल श्रम कराने वाले के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके अलावा खजूर और केले के चिप्स जैसे पैकेटों पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी तिथि संदिग्ध पाई गई।

कई पैकेटों पर छपी हुई तिथि के बजाय हाथ से स्टैंप लगाकर तिथियां बदली हुई मिली। जांच में सामने आया कि दिसंबर और जनवरी के अंडे व अन्य खाद्य सामग्री अब मार्च के महीने में वितरित की जा रही है। गोदाम में न तो तापमान बनाए रखने की सुविधा दिखी और न ही स्टॉक रजिस्टर अपडेट मिले। सामग्री की गुणवत्ता का कोई सर्टिफिकेट भी उपलब्ध नहीं पाया गया। छापेमारी के दौरान डीएम ने टिहरी, उत्तरकाशी और डोईवाला के लिए राशन लेकर निकलने वाले वाहनों को मौके पर ही रुकवा लिया। इन वाहनों में लदी सामग्री की ऑन-स्पॉट सैंपलिंग कराई गई, ताकि लैब में इनकी जांच की जा सके। विशेष रूप से अंडों की गुणवत्ता संदिग्ध पाए जाने पर डीएम ने सख्त नाराजगी जताई। डीएम ने बताया कि बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।

