ऋषिकेश
रायवाला कोतवाली क्षेत्र के छिद्दरवाला में एक ऐसा सनसनीखेज मामला पकड़ा गया है, जिसे देखकर प्रशासन के भी होश उड़ गए। एक शांत रिहायशी इलाके में किराये के मकान के अंदर घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडरों से खतरनाक तरीके से अवैध रिफलिंग का काला कारोबार पकड़ा गया है। पूर्ति विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने जब अचानक इस अड्डे पर छापा मारा, तो वहां 94 गैस सिलेंडर और रिफलिंग के हाई-टेक उपकरण बरामद हुए।
गुप्त सूचना के आधार पर जब पूर्ति निरीक्षक गोकुल रमोला, लोकेश पंत, विजय नैथानी, महेंद्र सिंह, मोहित चंद रमोला और पुलिस टीम ने छिद्दरवाला के उस मकान पर धावा बोला, तो अंदर का नजारा देख सब सन्न रह गए। आरोपी बेखौफ होकर एक से दूसरे सिलेंडर में गैस ट्रांसफर कर रहे थे। टीम ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चार शातिरों को रंगेहाथों दबोच लिया। पकड़े गए आरोपियों में रामजीत सिंह अमितग्राम, ऋषिकेश और सुमित नरदौली पुख्ता, कासगंज, यूपी शामिल हैं, जबकि जांच में वीर सिंह और राजीव कुमार के नाम भी सामने आए हैं।

🔍 मौके से मिला विस्फोटक सामान
94 गैस सिलेंडर: इसमें 62 भारी-भरकम व्यावसायिक और 32 घरेलू गैस सिलेंडर शामिल हैं, जो खाली और भरे दोनों हालत में मिले।
मौत का मोटर तंत्र: 5 मोटर चलित हाई-टेक रिफलिंग किट, 3 वजन तौलने के कांटे और अन्य संदिग्ध सामान।
वाहन सीज: मौके पर खड़ा एक लोडर वाहन भी पुलिस ने कब्जे में लेकर सीज कर दिया है।
🌐 ऋषिकेश से दून तक फैला था ‘मौत का नेटवर्क’
यह कोई छोटा-माोटा अवैध धंधा नहीं था, बल्कि इसके तार दूर-दूर तक जुड़े थे। शुरुआती जांच और सूत्रों के मुताबिक, इस अड्डे से गैस की सप्लाई ऋषिकेश, देहरादून और डोईवाला के इलाकों में धड़ल्ले से की जा रही थी। दुकानदारों और ठेली-ढाबे संचालकों को ये सिलेंडर मुंहमांगे और महंगे दामों पर बेचे जा रहे थे। जरा सोचिए, अगर थोड़ी सी भी चूक हो जाती, तो यह पूरा इलाका एक बड़े धमाके से दहल सकता था।
❓ सबसे बड़ा सवाल: आखिर कहाँ से आए इतने सिलेंडर?
पुलिस और पूर्ति विभाग की इस ताबड़तोड़ कार्रवाई ने भले ही बड़ा पर्दाफाश कर दिया हो, लेकिन सबसे बड़ा और खौफनाक सवाल अब भी हवा में तैर रहा है—आखिर ये 94 सिलेंडर आए कहां से थे?
क्या किसी गैस एजेंसी की मिलीभगत से यह काला बाजार चल रहा था या कोई बड़ा सिंडिकेट इसके पीछे है? पूर्ति विभाग का कहना है कि उनका फोकस अवैध रिफलिंग रोकने पर था, जबकि पुलिस अब इस बात की थाह लेने में जुटी है कि इस अवैध साम्राज्य की जड़ें कहां कहां तक फैली हैं।
फिलहाल, आरोपियों के खिलाफ BNS और आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस की इस कार्रवाई से गैस माफियाओं में हड़कंप मच गया है, लेकिन मुख्य सरगनाओं तक पहुंचना और सिलेंडरों के असली स्रोत का राज खुलना अभी बाकी है!
