

ऋषिकेश
बरसात के मौसम में ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में मौसमी बीमारियों और संक्रामक रोगों के मामलों में तेजी देखी जा रही है। डेंगू और स्वाइन फ्लू के मामले भी पकड़ में आए है। जिसने शहरवासियों की चिंता बढ़ा दी है। ऋषिकेश स्थित निर्मल आश्रम अस्पताल के फिजिशियन डॉ. अखिलेश राजपूत और अमित रौतेला ने बरसात में फैलने वाले वायरस, डेंगू, स्वाइन फ्लू H1N1 और अन्य बीमारियों से बचने के लिए लोगों को सावधान करते हुए टिप्स जारी किए हैं। दोनो डॉक्टरों के अनुसार, इन दिनों अस्पताल की ओपीडी में आने वाले मरीजों में बड़ी संख्या मौसमी बुखार और संक्रमण से पीड़ितों की है। ओपीडी में 70 प्रतिशत मरीज बुखार और कम प्लेटलेट्स की समस्या से ग्रसित पहुंच रहे हैं। डॉक्टरों ने बताया कि बरसात के बाद दूषित भोजन पानी और अनहाइजीनिक जगहों पर जाने से वायरल और बैक्टीरियल इंफेक्शन फैल रहा है। ऋषिकेश क्षेत्र के 3 मरीजों में H1N1 स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। पिछले एक महीने में डेंगू के 7 से 8 मरीज अस्पताल में पहुंचे हैं। पहाड़ों और नमी वाले इलाकों से आने वाले मरीजों में कीटों के काटने से फैलने वाले स्क्रब टाइफस के मामले भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में लोगों को अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक और सावधान रहने की बेहद ज्यादा जरूरत है।

डेंगू के मुख्य लक्षण
तेज बुखार (103°F या उससे अधिक)
रीढ़ की हड्डी और जोड़ों में severe बॉडी पेन (Backbone Fever)
आंखों के पीछे दर्द होना
उल्टी और दस्त की समस्या
क्या करें और क्या न करें: डॉक्टर की अहम सलाह
बिना डॉक्टरी सलाह के न लें ये दवाइयां: बुखार होने पर लोग अक्सर मेडिकल स्टोर से डिक्लोफेनाक (Diclofenac), एक्लोफेनाक (Aceclofenac), निमुसलाइड (Nimesulide) या इटोरिकॉक्सिब जैसी पेनकिलर दवाइयां ले लेते हैं। डॉ. राजपूत ने चेतावनी दी है कि डेंगू या वायरल बुखार में ये दवाइयां लेने से प्लेटलेट्स तेजी से घट सकती हैं और बलीडिंग (रक्तस्राव) का खतरा बढ़ सकता है। केवल पैरासिटामोल ही सुरक्षित विकल्प है।

मास्क और कफ एटीकेट का पालन करें: भीड़भाड़ वाले इलाकों में जाने पर मास्क जरूर पहनें। खांसते या छींकते समय मुंह पर कपड़ा रखें ताकि संक्रमण दूसरों तक न फैले।
खुद को हाइड्रेटेड रखें: पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थों (Hydration) का सेवन करें।

डॉक्टर से परामर्श लें: यदि तेज बुखार पैरासिटामोल लेने के बाद भी न उतरे, तो तुरंत नजदीकी फिजिशियन या विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यक ब्लड टेस्ट करवाएं।
