
ऋषिकेश
तीर्थनगरी के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, आवास विकास में विगत दिनों शिक्षा और सम्मान का एक अनुपम दृश्य देखने को मिला। अवसर था अल्मोड़ा स्थित विवेकानन्द इंटर कॉलेज रानीधारा के वरिष्ठ आचार्य भास्कर कांडपाल के भव्य सम्मान समारोह का। शिक्षा के प्रति उनके समर्पण और उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए विद्यालय परिवार ने उन्हें भावपूर्ण विदाई और सम्मान दिया।
गरिमामय रहा सम्मान समारोह
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय की परंपराओं के अनुरूप हुआ। प्रधानाचार्य उमाकांत पंत एवं समस्त आचार्य वर्ग ने आचार्य कांडपाल को अंगवस्त्र ओढ़ाकर सम्मानित किया।स्मृति-चिह्न भेंट कर उनकी सेवाओं को सराहा। बेज अलंकृत कर उन्हें विशेष सम्मान प्रदान किया। जैसे ही सम्मान की प्रक्रिया शुरू हुई, पूरा हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा, जो शिक्षक और शिष्य के बीच के अटूट विश्वास और सम्मान का प्रतीक था। अपने ओजस्वी संबोधन से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध करते हुए आचार्य भास्कर कांडपाल ने कहा कि शिक्षा केवल अंकों की प्राप्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह व्यक्तित्व के परिष्कार की एक साधना है। शिक्षक उस दीपक की तरह है जो स्वयं जलकर दूसरों के जीवन को आलोकित करता है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि आज के प्रतिस्पर्धी युग में चरित्र निर्माण सबसे महत्वपूर्ण है। सच्ची सफलता वही है, जो समाज और राष्ट्र के उत्थान में काम आए। प्रधानाचार्य उमाकांत पंत ने अपने वक्तव्य में आचार्य कांडपाल के अनुभवों को विद्यालय के लिए एक धरोहर बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित शिक्षकों का सान्निध्य न केवल छात्रों के लिए, बल्कि साथी शिक्षकों के लिए भी नई ऊर्जा और मार्गदर्शन का संचार करता है। समारोह के अंत में सभी शिक्षकों और विद्यार्थियों ने शिक्षा के उच्च आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। यद्यपि कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ, लेकिन आचार्य कांडपाल के विचारों की गूंज और उनके द्वारा दिखाए गए संस्कारों की छाप उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति के मानस पटल पर अंकित हो गई।
