
ऋषिकेश
हिमालय की गोद और मां गंगा के पावन तट पर स्थित परमार्थ निकेतन में आज एक गरिमामय दृश्य देखने को मिला। यहां भारतीय फिल्म जगत के प्रसिद्ध अभिनेता सुनील शेट्टी और उनकी धर्मपत्नी माना शेट्टी ने स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी के सान्निध्य में अलौकिक आध्यात्मिक शांति का अनुभव किया। स्वामी चिदानन्द सरस्वती और सुनील शेट्टी के बीच भारतीय सिनेमा की समाज निर्माण में भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। संवाद के मुख्य बिंदु रहे।
सनातन मूल्य: फिल्मों के माध्यम से भारतीय संस्कृति, परिवार व्यवस्था और नारी सम्मान के संदेश को करोड़ों लोगों तक पहुँचाना।
पर्यावरण संरक्षण: प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और पर्यावरण चेतना को जन-आंदोलन बनाना।
युवाओं को दिशा: तकनीक और आधुनिकता के साथ-साथ संस्कारों और चरित्र निर्माण पर जोर देना।
स्वामी ने कहा, आज फिल्में केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज निर्माण का यज्ञ बन सकती हैं। सफल होना ज़रूरी है, लेकिन संवेदनशील बने रहना उससे भी अधिक आवश्यक है।
‘रेस्क्यू फाउंडेशन’ की बच्चियों से आत्मीय भेंट
इस यात्रा का सबसे भावुक क्षण वह था जब सुनील शेट्टी ने परमार्थ निकेतन में ठहरीं रेस्क्यू फाउंडेशन (मुंबई और दिल्ली) की बच्चियों से मुलाकात की। शेट्टी जी ने बच्चियों को आत्मविश्वास और साहस का मंत्र दिया।उन्होंने प्रेरित करते हुए कहा कि सकारात्मक सोच से किसी भी विपरीत परिस्थिति को अवसर में बदला जा सकता है। अभिनेता का स्नेह पाकर बच्चियों के चेहरों पर मुस्कान खिल उठी।
भावविभोर हुईं माना शेट्टी
परमार्थ निकेतन के अनुशासित और सात्त्विक वातावरण को देखकर श्रीमती माना शेट्टी भावविभोर हो गईं। उन्होंने इसे एक ‘आत्मिक पुनर्जागरण’ बताते हुए कहा कि गंगा तट की शांति और साधना की ऊर्जा मन को भीतर तक सुकून देती है। कार्यक्रम के समापन पर सुनील शेट्टी, माना शेट्टी और उनके मित्रों ने स्वामी जी के साथ मिलकर विश्व शांति, राष्ट्र कल्याण और समस्त मानवता की भलाई के लिए विशेष प्रार्थना की। मां गंगा की आरती और वेदमंत्रों की गूँज ने पूरे वातावरण को दिव्य ऊर्जा से भर दिया।
