ऋषिकेश
ऋषिकेश में दशहरा पर्व के अवसर पर बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में त्रिवेणी घाट, आईडीपीएल, लक्ष्मण झूला, भरत विहार, 14 बीघा और टीएचडीसी कॉलोनी में रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले जलाए जाएंगे। इन पुतलों को तैयार करने वाले कारीगर मुजफ्फरनगर क्षेत्र के रहने वाले मुस्लिम समुदाय से हैं। जो पिछले कई दशक से हिंदू मुस्लिम भाईचारे की मिसाल भी पेश करने में लगे हैं। इस संबंध में कारीगर शफीक अहमद ने बताया कि उनके पिता रियाजुद्दीन सबसे पहले 1964 में आईडीपीएल में रावण का पुतला बनाने आए थे। तब से लेकर अब तक लगभग 60 वर्षों से उनका परिवार इस कार्य को करता आ रहा है। अब उनकी तीसरी पीढ़ी इस काम को संभालने के लिए तैयार हो चुकी है। इस बार डेढ़ महीने की कड़ी मेहनत और मशक्कत के बाद उन्होंने 12 से 15 पुतलों का निर्माण किया है। ये पुतले लक्ष्मण झूला, त्रिवेणी घाट, आईडीपीएल, टीएचडीसी और चौदह बीघा आदि क्षेत्रों की रामलीलाओं के लिए तैयार किए गए हैं। दूसरे धर्म से होने के बावजूद हिंदू धर्म के इस बड़े कार्य को करने पर शफीक अहमद का कहना है कि उन्हें बहुत अच्छा लगता है। इससे यह सीख मिलती है कि बुराई चाहे कितनी भी ऊंची क्यों न हो, अच्छाई के सामने उसका कद हमेशा छोटा होता है। रावण का पुतला यह शिक्षा भी देता है कि बड़े से बड़े विद्वानों से भी गलतियां हो जाती हैं।
