
ऋषिकेश
उत्तराखंड पॉवर कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा श्यामपुर न्याय पंचायत की चार ग्राम सभाओं में एक करोड़ रुपए का बिजली बिल भेजना अब विभाग के लिए गले की फांस बनता नजर आ रहा है। ऋषिकेश के अंतर्गत आने वाली खदरी खड़क माफ श्यामपुर, प्रतीत नगर और रायवाला ग्राम पंचायत को ऊर्जा निगम ने स्ट्रीट लाइटों का करीब एक करोड़ रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया। इस बिल को देखकर जहां एक तरफ ग्रामीण और जनप्रतिनिधि सकते में आ गए, वहीं दूसरी तरफ ग्राम सभा ने पलटवार करते हुए नहले पर दहला मार दिया है।ग्राम सभा ने बैठक कर एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसके तहत अब पंचायत क्षेत्र की भूमि पर लगे बिजली के पोलों का किराया सीधे ऊर्जा निगम से वसूला जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता शांति प्रसाद थपलियाल ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यूपीसीएल ने ग्राम खदरी पंचायत क्षेत्र में लगी 1313 स्ट्रीट लाइटों को कमर्शियल एक्टिविटी के दायरे में डाल दिया है। विभाग ने 7.85 रुपये प्रति यूनिट की दर से पिछले छह महीनों का बिल 10 लाख रुपये से अधिक का बनाया। इसके साथ ही, इसमें 28 लाख से ज्यादा का पुराना बकाया जोड़कर कुल 39 लाख 12 हजार का बिल ग्राम पंचायत सचिव को भेज दिया। बिजली विभाग के इस कदम से नाराज ग्राम सभा ने आपात बैठक बुलाई। ग्रामीणों का तर्क है कि स्ट्रीट लाइटें सार्वजनिक सुरक्षा और जनता की सुविधा के लिए हैं, इससे किसी का व्यक्तिगत फायदा नहीं है। पॉवर कॉर्पोरेशन ग्राम पंचायत में कोई परमार्थ का काम नहीं कर रहा है। न तो उन्होंने कोई प्याऊ लगाया है, न धर्मशाला बनाई है और न ही निराश्रितों के लिए कोई काम किया है। जब वे कमर्शियल रेट पर बिल वसूल रहे हैं, तो पंचायत की भूमि पर लगे उनके खंभों का किराया क्यों न लिया जाए। ग्राम सभा ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है कि क्षेत्र में लगे कुल 1313 बिजली के पोलों का 500 रुपए प्रति माह की दर से भूमि किराया वसूला जाए। इस हिसाब से प्रति माह का किराया 6 लाख 56 हजार 500 रुपये बनता है। इस संबंध में पंचायत की ओर से पॉवर कॉर्पोरेशन को बकायदा एक आधिकारिक पत्र भी भेज दिया गया है। पंचायत द्वारा तैयार किए गए इस उल्टे बिल का गणित भी बेहद दिलचस्प है। 6 महीने का पोल किराया लगभग 39 लाख रुपये बनाया है। ग्राम पंचायत ने तय किया है कि ऊर्जा निगम द्वारा भेजे गए 39 लाख के पहले बिल को वे इस किराए के साथ बराबर करे। इसके बाद, स्ट्रीट लाइट का हर 6 महीने का जो औसतन 10 लाख का बिल आएगा, उसे काटकर बाकी बचे 28 लाख रुपये हर छह महीने में ऊर्जा निगम को ग्राम पंचायत के खाते में जमा कराने होंगे। ग्राम पंचायत के इस आक्रामक और कानूनी दांव के बाद उत्तराखंड पॉवर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह का यह पहला मामला है जहां किसी पंचायत ने सरकारी विभाग से ही अपनी जमीन का किराया मांग लिया हो। अब देखना यह होगा कि ऊर्जा निगम इस उल्टे बिल का क्या जवाब देता है।
